नगर निगम इंदौर के बजट सम्मेलन में कांग्रेस की महिला पार्षद फौजिया अलीम और रूबीना खान द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम न गाने के मामले पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने दोनों पार्षदों से पूछा कि राष्ट्रगीत का अपमान क्यों किया। साथ ही राज्य शासन और निगम को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में यह जनहित याचिका एडवोकेट योगेश हेमनानी ने प्रस्तुत की है। कहा है कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को लेकर कानून और संविधान में गाइडलाइन है। अगर भारत का कोई नागरिक उसे नहीं गाता है या किसी तरह उसका अपमान करता है तो सजा का प्रविधान है, लेकिन राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन नहीं है।

स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग 

याचिका में राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह स्पष्ट करें कि पार्षदों ने राष्ट्रगीत गाने से इन्कार किया था या उसका अपमान किया था। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि पार्षदों ने राष्ट्रगीत गाने से इन्कार करने के साथ-साथ उसका अनादर भी किया था। यह संविधान के अनुच्छेद 51 सहित राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत गलत है।

इस पर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए इस मामले में राज्य शासन, नगर निगम, दोनों महिला पार्षदों को नोटिस जारी कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शासकीय अधिवक्ता से इस मामले में अब तक की गई कार्रवाई के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने दोनों पार्षदों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने इस मामले में केंद्र शासन को भी पक्षकार बनाने की बात कही। इस पर कोर्ट ने कहा कि आप पहले याचिका में जवाब पेश करें। कोर्ट अब इस मामले में 11 मई को सुनवाई करेगी। 

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